|
|
||
26 ارديبهشت 1388 13:02 |
| دلم میخواد داد بزنم |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| یه گلم، توی یه گلدون اسیرم |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| شب روی پنجره چادر میکشه |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| جادههای ملتهب! زمینو زیر و رو کنین |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| عابرم، شکسته از غم |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| یه مترسک تو کویرم |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| ماه میخواد تا جون داره به انتظارت بشینه |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| خسته شدم بس که نگاهت رو با |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| والّا معصیت داره، از ستاره ترسیدن |
24 ارديبهشت 1388 15:02 |
| بیا و از سحر بگو |
24 ارديبهشت 1388 14:02 |
| بگو کدوم ستارهای سر زده از چشای تو؟ |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| باز عمو نوروز اومده |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| میرم از باغچهی رؤیا گل نرگس بچینم |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| نمیتونم برم از این قصه، عزیزم، چه کنم؟ |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| تو همون میکدهای که عاقلا برات هلاکن |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| یه روزی از همین روزا، یکی باید طلوع کنه |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| یخزده خونِ تو رَگام، میلرزه بیتو، دست و پام |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| تکیه میزنن به بارون شونههای سنگی من |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| ای مسافر همیشه |
22 ارديبهشت 1388 16:02 |
| جادههای منتظر! پس آخر دنیا کجاس؟ |
| 1 | 2 | 3 |
26 ارديبهشت 1388 13:02 










